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इंडोनेशिया में ज़मीन और इमारतें पट्टे पर लेना

इंडोनेशियाई कानून में पट्टा कैसे चलता है, Hak Pakai से उसकी तुलना, मालिक के बेचने या मरने पर क्या होता है, और किराए पर 10% अंतिम कर।

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पट्टा (sewa) आपको ज़मीन या इमारत का टाइटल रखे बिना उसका उपयोग करने देता है। विदेशी और कंपनियाँ भी पट्टा ले सकती हैं। ज़मीन मालिक के पास ही रहती है, और ज़्यादातर शर्तें वही होती हैं जिन पर दोनों पक्ष सहमत हों।

फिर भी यह मालिक के साथ किया गया अनुबंध है, ज़मीन का अधिकार नहीं। पट्टा उतना ही मज़बूत है जितना मालिक का टाइटल, विलेख के शब्द और वे कदम जो आप इसे उस हर व्यक्ति को दिखाने के लिए उठाते हैं जो आगे चलकर ज़मीन खरीदे या उसके भरोसे कर्ज़ दे।

पट्टे के बारे में कानून क्या कहता है

नागरिक संहिता पट्टे को ऐसा समझौता बताती है जिसमें एक पक्ष दूसरे को तय अवधि के लिए किसी चीज़ का उपयोग एक कीमत के बदले देता है (अनुच्छेद 1548)। बुनियादी कृषि-भूमि कानून (1960 का कानून संख्या 5) इसमें इमारत बनाने के लिए ज़मीन पट्टे पर लेने का अधिकार (hak sewa untuk bangunan) जोड़ता है: किराए के बदले किसी और के पूर्ण मालिकाना हक वाली ज़मीन पर इमारत खड़ी करने का अधिकार, जिसका किराया एक साथ या किस्तों में, ज़मीन का उपयोग करने से पहले या बाद में चुकाया जाता है। यह अधिकार इंडोनेशियाई नागरिकों, इंडोनेशिया में निवास करने वाले विदेशियों, इंडोनेशियाई कंपनियों और इंडोनेशिया में प्रतिनिधि रखने वाली विदेशी कंपनियों के पास हो सकता है।

लिखित पट्टा बिना किसी नोटिस के समाप्ति तिथि पर खत्म हो जाता है (नागरिक संहिता का अनुच्छेद 1570)। अगर आप वहीं टिके रहते हैं और मालिक आपको रहने देता है, तो अलिखित पट्टों के नियमों के तहत एक नया पट्टा बन जाता है, जो तब तक चलता है जब तक कोई एक पक्ष नोटिस न दे (अनुच्छेद 1571 और 1573)। ज़मीन पर निर्माण कर चुके किसी भी व्यक्ति के लिए यह कमज़ोर स्थिति है, इसलिए नवीनीकरण की शर्तें विलेख में ही लिखी होनी चाहिए।

पट्टे को नोटरी विलेख के रूप में बनवाएँ। प्रामाणिक विलेख पक्षों और उनके वारिसों के बीच अपनी विषय-वस्तु का पूरा सबूत होता है (नागरिक संहिता का अनुच्छेद 1870)।

प्रमाणपत्र वाली ज़मीन के लिए, 2021 का सरकारी विनियम संख्या 18 संबंधित पक्ष को भूमि कार्यालय से पट्टे को सार्वजनिक रजिस्टर में या प्रमाणपत्र पर दर्ज कराने को कहने देता है (अनुच्छेद 90)। एक बार दर्ज हो जाने पर, जो भी ज़मीन खरीदने या उसके भरोसे कर्ज़ देने से पहले प्रमाणपत्र जाँचेगा, उसे आपका पट्टा दिखेगा।

अगर मालिक बेचे, मरे या कर्ज़ ले

बिक्री से मौजूदा पट्टा खत्म नहीं होता, जब तक कि पट्टे में खुद इसकी गुंजाइश न रखी गई हो (नागरिक संहिता का अनुच्छेद 1576)। विलेख में ऐसी कोई धारा देखें जो बिक्री पर मालिक को पट्टा खत्म करने दे।

किसी भी पक्ष की मृत्यु से पट्टा खत्म नहीं होता (अनुच्छेद 1575)। मालिक के वारिस मालिक की जगह ले लेते हैं, और असल दिक्कत उन सबसे नवीनीकरण या सहमति पर हस्ताक्षर करवाने में आती है।

बंधक कानून (1996 का कानून संख्या 4) बैंक को बंधक विलेख में यह वचन लिखवाने देता है कि मालिक बैंक की लिखित सहमति के बिना संपत्ति पट्टे पर नहीं देगा, पट्टे की कोई शर्त नहीं बदलेगा और अग्रिम किराया नहीं लेगा (अनुच्छेद 11)। अगर ज़मीन पहले से बंधक है, तो पैसे देने से पहले वह सहमति ले लें, वरना बैंक के बंधक पर कार्रवाई करने की स्थिति में आपका पट्टा कमज़ोर पड़ जाएगा।

पट्टा या Hak Pakai

घर के लिए विदेशी उपयोग का अधिकार (Hak Pakai) भी रख सकता है, जैसा विदेशी के रूप में संपत्ति खरीदना लेख समझाता है। दोनों की तुलना इस तरह है:

पट्टा (sewa)Hak Pakai
यह क्या हैमालिक के साथ अनुबंधपंजीकृत भूमि अधिकार
अवधिजो विलेख में लिखी होपूर्ण मालिकाना हक वाली ज़मीन पर अधिकतम 30 साल, फिर नया विलेख
प्रमाणनोटरी विलेख, जिसे प्रमाणपत्र पर दर्ज कराया जा सकता हैअपना अलग भूमि प्रमाणपत्र
बंधकइस पर बंधक नहीं रखा जा सकतानिश्चित अवधि हो तो इस पर बंधक रखा जा सकता है
मालिक के बेचने परजारी रहता है, जब तक पट्टे में कुछ और न लिखा होपंजीकरण के बाद आगे के हर मालिक पर लागू होता है

कंपनी के सामने भी यही चुनाव होता है। विदेशी स्वामित्व वाली कंपनी (PT PMA) अपने कारोबार के लिए निर्माण का अधिकार (Hak Guna Bangunan, HGB) रख सकती है। पट्टा उसकी पूँजी को ज़मीन में फँसने से बचाता है, लेकिन कारोबार किसी और के टाइटल पर टिका रहता है।

HPL के ऊपर बने HGB पर पट्टा

औद्योगिक एस्टेटों और बंदरगाह इलाक़ों की कुछ ज़मीन, और नई राजधानी के प्राधिकरण के प्रबंधन वाली ज़मीन, प्रबंधन के अधिकार (Hak Pengelolaan, HPL) के तहत आती है, जो किसी सरकारी निकाय, सरकारी या क्षेत्रीय स्वामित्व वाली कंपनी या भूमि बैंक एजेंसी के पास होता है। HPL को बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। इसके बजाय अधिकार धारक आपके साथ भूमि उपयोग समझौता करता है, और उसकी मंज़ूरी से आपको HPL के ऊपर HGB या Hak Pakai दिया जा सकता है।

2021 के सरकारी विनियम संख्या 18 के तहत HPL पर HGB अधिकतम 30 साल चलता है, उसे अधिकतम 20 साल बढ़ाया जा सकता है और अधिकतम 30 साल के लिए नवीनीकृत किया जा सकता है, हर बार HPL धारक की मंज़ूरी से। समाप्त होने पर ज़मीन HPL धारक को लौट जाती है। समझौते में शुल्क, अवधि, अवधि-विस्तार और नवीनीकरण की शर्तें, और अंत में ज़मीन व इमारतों का स्वामित्व किसके पास रहेगा, यह तय होना चाहिए। अधिकार पर किसी भी कानूनी कार्रवाई के लिए, बंधक समेत, HPL धारक की सिफ़ारिश चाहिए। अगर आप ऐसी ज़मीन पर HGB धारक से इमारत पट्टे पर लेते हैं, तो वह समझौता देखने को कहें। एस्टेटों की जानकारी बंदरगाहों के पास औद्योगिक ज़मीन में है।

किराए पर कर

2017 के सरकारी विनियम संख्या 34 के तहत ज़मीन और इमारतों के किराए पर कुल रकम का 10% अंतिम आयकर लगता है। कुल रकम का मतलब है वह सब कुछ जो किरायेदार संपत्ति के लिए देता है, सेवा, रखरखाव और सुरक्षा शुल्क समेत, चाहे वे पट्टे में हों या अलग अनुबंध में। अगर किरायेदार कोई सरकारी निकाय, इंडोनेशियाई कंपनी, स्थायी प्रतिष्ठान या विनियम में नामित कर काटने वाले अन्य पक्षों में से एक है, तो वह कर काटकर जमा करता है। वरना कर संपत्ति का मालिक भरता है। होटल और ऐसे ही ठहरने के ठिकाने इस नियम के दायरे से बाहर हैं। अगर मालिक VAT के लिए पंजीकृत है, तो ऊपर से VAT भी लग सकता है।

हस्ताक्षर से पहले

  • भूमि कार्यालय में मालिक के प्रमाणपत्र की जाँच करें, जैसा ज़मीन का प्रमाणपत्र कैसे जाँचें में बताया गया है, और पक्का करें कि आपकी अवधि मालिक के अपने अधिकार की अवधि से आगे न जाए।
  • पूछें कि क्या ज़मीन बंधक है, और अगर है, तो बैंक की लिखित सहमति लें।
  • अगर ज़मीन वैवाहिक संपत्ति है, तो मालिक के जीवनसाथी से भी हस्ताक्षर करवाएँ।
  • नवीनीकरण की शर्तें, हर नई अवधि का किराया कैसे तय होगा, क्या आप आगे किराए पर दे सकते हैं और आपके बनाए किसी भी निर्माण का मालिक कौन होगा, यह सब लिखवाएँ। किसी धारा के बिना, नागरिक संहिता का डिफ़ॉल्ट नियम यह है कि आप अपना बनाया हुआ हटा सकते हैं, अपने खर्च पर और संपत्ति को नुकसान पहुँचाए बिना।
  • पट्टे को पट्टा ही रहने दें। बेचने की पावर ऑफ़ अटॉर्नी जैसे अलग सौदे इसे नॉमिनी व्यवस्था जैसा दिखा सकते हैं, और कानून ऐसी व्यवस्थाओं को शून्य ठहराता है।

यह सामान्य जानकारी है, कानूनी, कर या निवेश सलाह नहीं। नियम बदलते रहते हैं, इसलिए कोई कदम उठाने से पहले किसी नोटरी या वकील से मौजूदा नियमों की पुष्टि करें।